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झारखंड में 14वीं जेपीएससी परीक्षा में धांधली का मामला सामने आने के बाद छात्रों में पिछले 20 दिनों से आक्रोश दिख रहा है. मामले में सीआईडी ने मुख्य आरोपी अभय तिवारी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है. इस दौरान मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने बड़े-बड़े चौंकाने वाले दावे किए हैं. 

अभय तिवारी ने दावा किया की परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL को बिना किसी टेंडर के14वीं JPSC पीटी परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि यह ब्लैक लिस्टेड कंपनी थी. उसने बताया कि वह व कंपनी का एक अकाउंटेंट मिल कर अभ्यर्थियों के अंक कंप्यूटर के डेटा में हेरफेर कर बढ़ा देते थे, जिससे उसका सेलेक्शन हो जाता था.

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खाली छोड़नी पड़ती थी ओएमआर शीट

अभय ने बताया कि जो अभ्यर्थी इस गिरोह से से डील करता था उसे OMR शीट खाली छोड़ देने के लिए कहा जाता था. परीक्षा खत्म होने के बाद इन OMR शीट को कंपनी के रांची स्थित कार्यालय में लाया जाता था, फिर यहां कंपनी के तकनीकी कर्मचारी इन खाली गोल घेरों में सही उत्तर भर देते थे.

उसने यह भी खुलासा किया है कि जो अभ्यर्थी 50 लाख रुपये देते थे, वे अच्छे अंक लाकर अफसर बन जाते थे. आरोप लगाया कि जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते ने ब्लैक लिस्टेड आउट सोर्सिंग कंपनी TDPL को अवैध रूप से परीक्षा का ठेका देने के एवज में 2 करोड़ रुपये की डील की थी.

जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष पर उठे सवाल

इस बीच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष ख्यांग्ते पर भी सवाल उठ रहे हैं. इतना ही नहीं ख्यांग्ते को बिलिंग में 20 फीसदी हिस्सेदारी देने की बात भी तय हुई थी. जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा शुरू करने से लेकर अंतिम परिणाम जारी करने तक की सारी प्रक्रिया इसी कंपनी के अधीन थी.

हालांकि सीआईडी ने अभय तिवारी के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. सरकारी नौकरी में जाने से पहले अभय तिवारी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर था. गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर तैनात रहे अभय तिवारी को सीआईडी ने 22 जुलाई को गिरफ्तार किया था. फिलहाल CID की रिमांड पर है और पूछताछ जारी है.

अभय तिवारी ने लिखवाए थे उत्तर

मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने बिहार हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों से एजेंटों के जरिए 10 एक्सपर्ट्स को बुलाकर रांची में परीक्षाओं के उत्तर लिखवाए थे. एसीएफ, एफआरओ परीक्षा में अपने अभ्यर्थियों की मेंस परीक्षा के उत्तर लिखवाने के लिए उसने करीब 1 करोड़ रुपये दिए थे.

अभय तिवारी ने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट ऑफिसर (ACF) के लिए उसने 14 प्रतियोगियों से करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक वसूले थे. दावा किया गया है कि जिन अभ्यर्थियों के उत्तर अपेक्षाकृत बेहतर थे, उनके अंक बढ़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों से संपर्क कर उन्हें भी मोटी रकम दी गई. फिलहाल अभय तिवारी CID रिमांड पर है और उससे लगातार पूछताछ जारी है.

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