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Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी का व्रत 19 सितंबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा, लेकिन अष्टमी तिथि एक दिन पहले यानी 18 सितंबर की दोपहर से शुरू हो जाएगी. ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि क्या 18 सितंबर को अष्टमी लगते ही अन्न छोड़ना होगा या व्रत के नियम 19 सितंबर की सुबह से लागू होंगे? इसका जवाब तिथि और व्रत के दिन के अंतर में छिपा है.

कब शुरू होगी अष्टमी तिथि?

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर लगभग 1 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर लगभग 3 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी. पंचांग और स्थान के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि 19 सितंबर को रहेगी. इसलिए उदया तिथि के आधार पर राधा अष्टमी का पर्व और मुख्य व्रत 19 सितंबर को रखा जाएगा. राधा रानी की विशेष पूजा मध्याह्न काल में करने की परंपरा है.

यह भी पढ़ें- Radha Ashtami Puja 2026: राधा अष्टमी की पूजा कैसे करें, क्या भोग लगाएं? जानें व्रत के नियम

क्या 18 सितंबर दोपहर से अन्न छोड़ना होगा?

सामान्य गृहस्थ परंपरा में केवल अष्टमी तिथि शुरू होते ही अन्न छोड़ना अनिवार्य नहीं माना जाता. इसलिए 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे से सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन बंद करने जैसा कोई एक समान नियम नहीं है.

व्रत रखने वाले व्यक्ति 18 सितंबर को सामान्य लेकिन सात्विक भोजन कर सकते हैं. इस दिन मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज और बहुत तला-भुना भोजन छोड़ना बेहतर माना जाता है. रात का भोजन हल्का रखें और संभव हो तो सूर्यास्त के आसपास या जल्दी भोजन कर लें. इसके बाद अगले दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जा सकता है.

हालांकि वैष्णव संप्रदायों, मंदिरों और पारिवारिक परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं. यदि आपके गुरु, मंदिर या परिवार में दशमी-विद्धा अथवा पूर्व संध्या से अन्न त्यागने की परंपरा है तो उसी नियम का पालन करें.

19 सितंबर को व्रत कैसे शुरू करें?

19 सितंबर को सुबह स्नान के बाद राधा-कृष्ण के सामने व्रत का संकल्प लें. अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या केवल सात्विक भोजन वाला व्रत रखा जा सकता है. फलाहार में फल, पानी, नारियल पानी, दूध या परिवार की परंपरा में मान्य व्रत की चीजें ली जा सकती हैं.

मध्याह्न में राधा रानी और भगवान कृष्ण की पूजा करें. पंचामृत स्नान, चंदन, फूल, वस्त्र और श्रृंगार अर्पित करें. माखन-मिश्री, खीर, फल या घर में बना सात्विक मिष्ठान भोग में रखा जा सकता है.

व्रत कब खोलें?

राधा अष्टमी व्रत के पारण को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं. कुछ श्रद्धालु मध्याह्न पूजा और आरती के बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ लोग अष्टमी तिथि समाप्त होने या अगले दिन पारण करते हैं. इसलिए स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें.

गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति या नियमित दवा लेने वाले लोग कठोर अथवा निर्जल व्रत न रखें. राधा अष्टमी में भक्ति और संयम मुख्य हैं, स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना व्रत का उद्देश्य नहीं है.

FAQ

राधा अष्टमी 2026 कब है?
राधा अष्टमी का व्रत 19 सितंबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा.

अष्टमी तिथि कब शुरू होगी?
नई दिल्ली के अनुसार अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर लगभग 1 बजे शुरू होगी. स्थान के अनुसार समय बदल सकता है.

क्या 18 सितंबर दोपहर से अन्न छोड़ना जरूरी है?
सामान्य गृहस्थ परंपरा में ऐसा अनिवार्य नहीं है. श्रद्धालु 18 सितंबर को सात्विक और हल्का भोजन कर सकते हैं.

राधा अष्टमी का व्रत कब शुरू करें?
19 सितंबर को सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जा सकता है.

राधा अष्टमी व्रत में क्या खा सकते हैं?
अपनी परंपरा के अनुसार फल, पानी, नारियल पानी और मान्य फलाहारी चीजें ली जा सकती हैं.

राधा अष्टमी का व्रत कब खोलें?
पारण का नियम संप्रदाय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार बदलता है. स्थानीय पंचांग या गुरु-परंपरा का पालन करें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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