पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. 2027 में राज्य की 117 सीटों पर चुनावों से पहले शिरोमणी अकाली दल (SAD)और बीजेपी के बीच गठबंधन की अटकलें जोर पकड़ रही हैं.
हालांकि, अभी तक गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है. दावे किये जा रहे हैं कि SAD तो कई बार बीजेपी को गठबंधन को लेकर इशारे कर रहा, लेकिन बीजेपी अकेले ही चुनावों में उतरने के संकेत दे रही है.
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SAD बीजेपी के साथ नहीं, नीति खिलाफ नहीं
ये अकाली दल ही था जिसने साल 2020 के कृषि कानूनों के मुद्दों को लेकर बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया था. बीजेपी ने बाद में इसे वापस भी लिया था, लेकिन अकाली दल ने तब वापसी के कोई संकेत नहीं दिए. ये साल 2022 का राष्ट्रपति चुनाव था जब पहली बार अकाली जल ने बीजेपी को संकेत दिए कि वो उसके साथ खड़ी है. अकाली दल ने जुलाई 2022 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन देकर संकेत दिया था कि बीजेपी के साथ नहीं है, लेकिन उसके खिलाफ कोई नीति नहीं अपनाई.
ग्राउंड लेवल पर दिया BJP का खुला समर्थन
इसी साल पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के छात्र संगठन स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SOI) ने बीजेपी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार को अपना समर्थन देकर सभी को चौंका दिया था. इस समर्थन के कारण ABVP उम्मीदवार अंकित बिढान को जीत मिली थी. इस घटनाक्रम के बाद ये संकेत दिया कि दोनों दल अकेले हैं, लेकिन SAD अब भी ग्राउंट लेवल पर बीजेपी के साथ है.
महिला आरक्षण बिल को SAD का समर्थन
इसी साल अगस्त 2026 में अकाली दल ने महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग की थी और इसपर केंद्र सरकार के रूख का समर्थन किया था. इस मांग से पहले पार्टी के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी. इससे एक बार फिर से SAD ने बीजेपी को हिंट दिया कि वो अब बीजेपी के साथ है. हालांकि, बीजेपी ने हर बार यही कहा है कि वो अकेले ही पंजाब के चुनावों में उतरेगी.
SAD के हिंट, बीजेपी की अनदेखी
अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की अटकलों ने जोर पकड़ा जब SAD के कई नेताओं ने बयान में संकेत दिए कि जनता चाहेगी तो गठबंधन होगा. इसके साथ ही गठबंधन को लेकर बातचीत के भी संकेत मिले. खुद अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि पंजाब के लोग चाहते हैं कि अकाली दल और बीजेपी मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ें. अकाली नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी अपने बयान के जरिए कुछ इसी ओर इशारा किया.
इन संकेतों के बावजूद पंजाब चुनाव को लेकर बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने हाल ही ये बयान दिया कि पार्टी राज्य की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बीएल संतोष के बाद 31 अगस्त को बीजेपी के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया ने भी यही संकेत दिए कि पार्टी अकेले ही मैदान में उतरेगी. इस बयान ने जाहिर कर दिया कि बीजेपी अब भी SAD के साथ गठबंधन को लेकर कुछ तय नहीं कर पाई है और अकेले ही मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है.
कितनी है गठबंधन की संभावना?
हालांकि, ताजा रिपोर्ट्स में ये भी दावे हैं कि पर्दे के पीछे दोनों दलों के बीच अभी भी गठबंधन को लेकर चर्चा जारी है और सीट शेयरिंग को लेकर पेंच फंसा हुआ है. खैर,अभी चुनावों में समय है और राजनीति में कभी भी कुछ भी संभव है. इस साल के अंत में आ चुनावों से ठीक पहले दोनों दल साथ आते हैं तो किसी को कोई हैरानी नहीं होगी. अब दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे या अकेले मैदान में उतरेंगे ये आने वाला समय ही बताएगा.
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