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अमेरिका की पूर्व कांग्रेस वुमन मार्जोरी टेलर ग्रीन ने ट्रंप सरकार पर ईरान से जारी तनाव को लेकर कई दावे किए हैं. उन्होंने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के संभावित इस्तेमाल पर चर्चा कर रहे हैं.

उनका आरोप है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी टकराव के दौरान हाई लेवल स्ट्रैटैजी मीटिंग्स में मुद्दा उठा है.

ग्रीन ने एक्स पोस्ट में दावा किया है कि ये चर्चाएं असली हैं. प्रशासन पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के लिए कम थ्रेशोल्ड का आरोप लगाया गया है. 

उन्होंने कहा, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन में यह पता नहीं चलता कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब है साथ ही उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर इजरायल की चेतावनियों पर निर्भर रहने का आरोप लगाया है. हालांकि ग्रीन ने किसी तरह के सबूत नहीं दिए हैं.

इधर, व्हाइट हाउस ने उनके आरोपों पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है. ईरान और अमेरिका के बीच अभी भी हॉर्मुज को लेकर तनाव बना हुआ है. यह तनाव 28 फरवरी से जारी है. 

ईरान पर लगातार प्रेशर बनाए हुए हैं डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप तेहरान पर दबाव बनाए हुए हैं. ट्रंप ने ईरान से रियायातों की मांग जारी रखी है. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने 14 अगस्त को कहा था कि वह जल्द ही हॉर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर देंगे. यह कदम अमेरिका जब ईरान को हरा देगा, तब उठाएगा.

इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने तेहरान के साथ चल रही बातचीत को ईरान के लिए आखिरी मौका बताया था. साथ ही चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि अगर ईरान किसी समझौते पर नहीं पहुंचता है, तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी.

ट्रंप ने बार बार कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. ग्रीन के आरोपों को बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन परमाणु विकल्पों पर चर्चा हो रही है. हॉर्मुज वॉशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव का मुख्य केंद्र बन गया है. इधर, कमर्शियल जहाजों पर हमलों के बाद इस जलमार्ग से टैंकरों की आवाजाही में भारी कमी आई है. 



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