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ऑपरेशन सिंदूर के बाद संबंधों में आई खटास के बीच भारत ने अमेरिका से जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल खरीदने का फैसला लिया है. इस बाबत भारतीय सेना ने अमेरिका से 148 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने के ऑफर पर हस्ताक्षर किए हैं. डील की कुल कीमत 45.7 मिलियन डॉलर यानी करीब 4400 करोड़ है. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने डील की जानकारी देते हुए इसे एक ‘बड़ी खबर’ बताया है.

उन्होंने शुक्रवार (28 अगस्त) को एक्स पर लिखा, ”बड़ी खबर! भारत बैटल-टेस्टेड जेवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने का प्लान बना रहा है. जैसा कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मई 2026 शांगरी-ला डायलॉग में बताया था, यह U.S.-भारत डिफेंस रिलेशनशिप में एक बड़ा कदम है. यह अमेरिकी और भारतीय सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को दर्शाती है और भविष्य में दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग का रास्ता खोलेगी. हमारे दोनों देशों के बीच एंगेजमेंट रिकॉर्ड हाई लेवल पर है.”

क्या है खास?

जैवलिन एक एडवांस, मीडियम रेंज, फायर एंड फोरगेट एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, जिसे अमेरिका की आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन कंपनी मिलकर बनाती हैं. यूएस आर्मी और अमेरिकी मेरीन कोर सहित कई देशों की सेनाएं, जैवलिन का इस्तेमाल करती हैं.

दुश्मन के टैंक और बंकर्स को तबाह करने के लिए जैवलिन मिसाइल का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी रेंज करीब ढाई (2.5) किलोमीटर है. इसे बख्तरबंद वाहनों और मजबूत किलेबंदी वाली जगहों समेत कई तरह के लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है.

फोरेन मिलिट्री सेल्स (एफएमएस) के तहत भारत ने 148 जैवलिन राउंट्स के साथ, एक जैवलिन मिसाइल एफजीएम-148 मिसाइल और 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट और इससे जुड़े हुए उपकरण खरीदने का फैसला किया है.



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