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भारत में घूमने के लिए लोगों के पास कई तरह की जगहें हैं. कोई पहाड़ों पर जाना पसंद करता है तो कोई समुद्र किनारे छुट्टियां बिताना चाहता है. वहीं बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो परिवार के साथ मंदिर, तीर्थ और दूसरे धार्मिक स्थानों पर जाना पसंद करते हैं. अब एक सरकारी सर्वे से पता चला है कि देश में होने वाली यात्राओं में धार्मिक सफर की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है.

जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच हुए सर्वे के अनुसार, पिछले एक साल में रात रुकने वाली यात्राओं में करीब 48 फीसदी यात्राएं धार्मिक या तीर्थ यात्रा के लिए थीं. यानी हर 100 यात्राओं में लगभग 48 यात्राओं की वजह आस्था रही. खास बात यह है कि यह आंकड़ा गांव और शहर दोनों जगह लगभग एक जैसा रहा.

 हर 100 में करीब 48 यात्राएं धार्मिक

सरकारी सर्वे के मुताबिक, पिछले एक साल में जिन लोगों ने ऐसी यात्रा की जिसमें कम से कम एक रात घर से बाहर रुकना पड़ा, उनमें करीब 48 फीसदी यात्राएं धार्मिक या तीर्थ जाने के लिए थीं. लोगों ने छुट्टियां मनाने, घूमने, इलाज और दूसरे कामों के लिए भी सफर किया, लेकिन धार्मिक यात्रा सबसे ज्यादा रही. आसान भाषा में समझें तो अगर 100 यात्राओं को देखा जाए तो उनमें करीब 48 यात्राएं मंदिर, तीर्थ या किसी धार्मिक जगह जाने के लिए हुईं. यह आंकड़ा भारत में आस्था से जुड़ी यात्राओं की बड़ी हिस्सेदारी दिखाता है.

गांव हो या शहर, दोनों जगह धार्मिक यात्रा आगे

इस सर्वे की एक खास बात यह भी है कि गांव और शहर दोनों जगह धार्मिक यात्राओं का हिस्सा 48 फीसदी रहा. यानी ऐसा नहीं है कि सिर्फ गांवों के लोग ही धार्मिक जगहों पर ज्यादा जाते हैं. शहरों में रहने वाले लोग भी बड़ी संख्या में तीर्थ और धार्मिक स्थानों की यात्रा कर रहे हैं. गांवों में धार्मिक यात्रा के बाद इलाज से जुड़ी यात्राएं ज्यादा रहीं, जबकि शहरों में घूमने और छुट्टियां मनाने वाली यात्राएं दूसरे नंबर पर रहीं. इससे साफ है कि धार्मिक यात्रा देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों के लिए सफर का बड़ा कारण है.

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ज्यादातर लोग छोटी यात्रा करना पसंद करते हैं

सर्वे में यह भी सामने आया कि ज्यादातर लोग बहुत लंबे समय के लिए यात्रा नहीं करते. करीब 80 फीसदी यात्राएं पांच दिन या उससे कम समय की थीं. यानी लोग कुछ दिनों के लिए घर से निकलकर अपना काम पूरा करके वापस लौटना ज्यादा पसंद करते हैं. एक यात्रा में औसत के हिसाब से करीब दो लोग शामिल रहे. आने-जाने के लिए भी लोगों ने अपनी सुविधा के हिसाब से अलग-अलग साधनों का इस्तेमाल किया. गांवों में बस का इस्तेमाल ज्यादा हुआ, जबकि शहरों में ट्रेन से यात्रा करने वालों की संख्या ज्यादा रही.

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा यात्री

राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या सबसे ज्यादा रही. सभी तरह की यात्राओं को मिलाकर देश की कुल विजिटर ट्रिप्स में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 15.7 फीसदी रही. इसके बाद तमिलनाडु और राजस्थान का नंबर आया. उत्तर प्रदेश में अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे कई बड़े धार्मिक स्थान हैं, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचते हैं. हालांकि यह 15.7 फीसदी आंकड़ा सिर्फ धार्मिक यात्राओं का नहीं, बल्कि सभी तरह की विजिटर ट्रिप्स का है.

 सबसे ज्यादा यात्रा धार्मिक, लेकिन खर्च कहीं और ज्यादा

धार्मिक यात्राएं संख्या में सबसे आगे जरूर रहीं, लेकिन सबसे ज्यादा खर्च वाली यात्राएं धार्मिक नहीं थीं. सर्वे के अनुसार इलाज के लिए की गई यात्राओं में लोगों का औसत खर्च काफी ज्यादा रहा. ग्रामीण इलाकों में इलाज से जुड़ी एक यात्रा पर औसतन 29,454 रुपये, जबकि शहरों में यह खर्च 41,649 रुपये रहा. इससे पता चलता है कि भारत में लोग सिर्फ घूमने के लिए ही सफर नहीं करते. धार्मिक यात्रा, इलाज, परिवार से जुड़े काम और दूसरे जरूरी कारण भी देश में होने वाली यात्राओं का बड़ा हिस्सा हैं.

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