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भारत राष्ट्र समिति ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लगभग 200 करोड़ की कीमती सरकारी जमीन अपने भाई की कंपनी को मात्र 7 करोड़ रुपये की मामूली कीमत पर आवंटित की. यह शिकायत केस नंबर 835/2026 के तौर पर दर्ज की गई है. हैदराबाद के पास प्रस्तावित ‘फोर्थ सिटी’ इलाके में रविर्याला में टेसेरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को लगभग 5 एकड़ जमीन आवंटित करने के मामले पर केंद्रित है.

BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव, जो इस मामले में पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, उन्होंने सरकार पर परिवार द्वारा संचालित, परिवार-केंद्रित, बिना किसी इनोवेशन और बिना किसी कर्मचारी वाली घोटाला योजना चलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने आवंटन के लिए पात्रता मानदंडों और निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में पूरी पारदर्शिता की मांग की है.

केटी रामा राव के आरोप
जमीन आवंटन के खिलाफ BRS का मामला टेसेरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स की साख पर केंद्रित है. रामा राव ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया है कि जिस कंपनी की पेड-अप कैपिटल (चुक्ता पूंजी) केवल एक लाख रुपये है और जिसकी अपनी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार कोई कर्मचारी नहीं है, वह इतनी महंगी सरकारी जमीन के लिए कैसे योग्य हो सकती है. उन्होंने मंत्री दुड्डिला श्रीधर बाबू के उस दावे को खारिज कर दिया है कि मुख्यमंत्री के भाई का कंपनी से कोई संबंध नहीं है. 

उन्होंने अनुमुला कोंडल रेड्डी की अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल और अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बयानों का हवाला दिया है, जिनमें उन्हें कंपनी का चेयरमैन बताया गया है. BRS नेता ने कर्नाटक में MUDA जमीन आवंटन घोटाले से इसकी तुलना करते हुए दावा किया है कि यह घटना उससे भी बड़ा घोटाला है, जिसके कारण मुख्यमंत्री को अपना पद गंवाना पड़ सकता है.

उद्योग मंत्री ने बताया राजनीतिक ड्रामा
उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने इन आरोपों को पूरी तरह से झूठा और पिछली BRS सरकार के घोटालों से ध्यान हटाने के लिए रचा गया राजनीतिक ड्रामा करार दिया है. उन्होंने कहा कि टेसेरैक्ट को ज़मीन का आवंटन ‘इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग पर सलाहकार समिति’ द्वारा पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से और सभी निर्धारित नियमों व प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करते हुए किया गया था. 

मंत्री ने कंपनी और मुख्यमंत्री के भाई के बीच किसी भी तरह के संबंध से सख्ती से इनकार किया है. इस बीच विपक्षी पार्टी BJP ने भी ‘सेक्शन 22 A’ जमीन विवाद की लोकायुक्त से जांच कराने की मांग का समर्थन किया है. उनका आरोप है कि लगभग एक लाख करोड़ रुपये की निजी ज़मीनों को मनमाने ढंग से सरकारी लिस्ट में शामिल किया गया है.

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