पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी में गठबंधन को लेकर चर्चा के बीच दोनों दलों के इस पर अलग अलग बयान विरोधाभास पैदा कर रहे हैं. एक तरफ जहां अकाली दल के कई नेताओं की तरफ से ऐसे बयान सामने आए हैं जिनसे ये साफ संकेत मिलते हैं कि दोनों दलों में गठबंधन के लिए बातचीत चल रही है, वहीं बीजेपी के नेता गठबंधन की किसी भी चर्चा को नकार रहे हैं और अकेल ही चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं. अब सवाल ये है कि आखिर गठबंधन को लेकर दोनों दलों में चल क्या रहा है.
दरअसल, अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा है कि पंजाब के लोग चाहते हैं कि अकाली दल और बीजेपी मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ें. वहीं मजीठिया की बहन और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी लुधियाना में एक रैली के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर भगवान की इच्छा रही तो ऐसे गठबंधन होंगे जिनसे जिस तरह पहले दिल्ली से पंजाब में विकास के काम होते थे, आने वाले समय में भी दिल्ली से पंजाब में विकास के कामों की नींव एक बार दोबारा रखी जाएगी.
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इसलिए लगीं गठबंधन की अटकलें
इन दोनों के बयान से साफ लगता है कि गठबंधन को लेकर दोनों दलों में चर्चा चल रही है. इसके अलावा गठबंधन की चर्चा को उस वक्त बल और मिल गया जब हाल ही में अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.
हालांकि सोमवार (24 अगस्त) को बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी एल संतोष ने पटियाला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि पार्टी राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी और किसी से कोई समझौता नहीं होगा. वहीं आज बीजेपी के पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी कहा कि पार्टी अकेले ही राज्य में चुनाव लड़ेगी और किसी से कोई समझौता नहीं होगा.
पंजाब में छोटा भाई नहीं बनना चाहती बीजेपी!
ऐसे में सियासी गलियों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बीजेपी क्यों गठबंधन की चर्चाओं को सिरे से खारिज कर रही है जबकि अकाली दल के नेता गठबंधन की वकालत कर रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी पिछले काफी समय से पंजाब में संगठन के विस्तार में लगी है और पार्टी की संगठनात्मक ताकत भी बढ़ी है. इसलिए अब बीजेपी पंजाब में पहले की तरह अकाली दल के छोटे भाई की भूमिका में गठबंधन नहीं करना चाहती, इसलिए बीजेपी चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा सीटें अकाली दल के साथ गठबंधन में हासिल करे.
पहले दोनों दल साथ लड़ चुके चुनाव
बता दें कि 2017 के चुनाव तक बीजेपी अकाली दल के साथ गठबंधन में 117 में से 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी, मगर इस बार यह चर्चा है कि बीजेपी कम से कम 45 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं में भी यह संदेश जाए कि पार्टी सम्मानजनक सीटों के साथ गठबंधन कर रही है. साथ ही बीजेपी पार्टी कार्यकर्ताओं का हौसला भी बरकरार रखना चाहती है जब तक कि गठबंधन की बात अंतिम नहीं हो जाती.
‘दोनों को एक दूसरे की जरूरत’
हालांकि विश्लेषकों के मुताबिक गठबंधन दोनों ही दलों की मजबूरी है. बीजेपी ने बेशक पंजाब में संगठन को मजबूत किया है और ऐसे क्षेत्रों में बीजेपी की पहुंच बनी है जहां पहले बीजेपी नहीं थी, मगर पार्टी के सामने यह प्रश्न है कि क्या यह राज्य में सरकार बनाने लायक स्थिति में आ सकती है या नहीं.
बीजेपी अकाली दल की मजबूरी?
वहीं अकाली दल को भी ऐसी बहुत सारी विधानसभा सीटें हैं, जहां पर बीजेपी के हिंदू वोट बैंक के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. साथ ही बीजेपी के साथ गठबंधन से पार्टी के प्रचार को भी जबरदस्त बल मिलेगा, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बीजेपी के तमाम बड़े नेता भी अकाली दल के लिए प्रचार करते दिखेंगे.
कांग्रेस ने ली चुटकी
इन सबके बीच अकाली दल और बीजेपी में चल रही इस स्थिति पर कांग्रेस चुटकी ले रही है. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा है कि अकाली दल और बीजेपी के नेताओं को कभी लगता है कि गठबंधन कर लें कभी लगता है कि न करें, क्योंकि दोनों ही दलों के नेताओं को मालूम है कि न तो बीजेपी के वोटर अकाली दल को वोट डालेंगे और न ही अकाली दल के वोटर बीजेपी को वोट डालेंगे.
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