पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर सियासी घमासान देखने को मिल रहा है. कोर्ट के नए चीफ जस्टिस के रूप में न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को नियुक्त किया गया है. इसको लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र सरकार पर हमलावर है और आरोप लगाया है कि नई नियुक्ति बिना राज्य सरकार की राय लिए बिना ही कर दी गई.
इस विवाद के बीच कांग्रेस ने पंजाब सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने AAP सरकार पर न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है.
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This is quite unprecedented that a state government is objecting to and opposing the appointment of the Chief Justice of the state High Court. @AAPPunjab has achieved yet another dubious distinction of doing that.
What does the AAP government want to convey with this stand?…— Amarinder Singh Raja Warring (@RajaBrar_INC) September 7, 2026
कांग्रेस ने AAP सरकार पर साधा निशाना
अमरिंदर सिंह वडिंग ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक्स पर लिखा, “ऐसा बिल्कुल पहली बार हुआ है कि कोई राज्य सरकार हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर ऐतराज कर रही है और उसका विरोध कर रही है. ऐसा करके AAP ने एक और अजीब उपलब्धि अपने नाम कर ली है. AAP सरकार आखिर अपने इस स्टैंड से क्या बताना चाहती है?”
उन्होंने आगे लिखा, “AAP सरकार न्यायपालिका की व्यवस्था में दखल देने की कोशिश करके अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर रही है, जबकि न्यायपालिका हमारे लोकतंत्र का एक स्वतंत्र पिलर है. क्या AAP अपनी पसंद की न्यायपालिका चाहती है?”
क्या है मामला?
दरअसल, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में नए चीफ जस्टिस के तौर पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार को नियुक्त किया गया है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ही न्यायमूर्ति अश्वनी के नाम की सिफारिश की थी. पंजाब की AAP सरकार ने इसपर आपत्ति जताई है और उसका कहना है कि केंद्र सरकार ने इसपर उनसे कोई राय नहीं ली. पंजाब कैबिनेट ने रविवार को एक प्रस्ताव भी पास किया है, जिसमें मांग की गई है कि उनकी ‘नियुक्ति और शपथ ग्रहण को रोक दिया जाए.’ इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति के लिए ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ (MoP) के तहत जरूरी राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना ही फैसला लिया है. वहीं, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने पंजाब की मान सरकार की इस आपत्ति पर सवाल उठाए हैं और चेतावनी दी है कि न्यायिक नियुक्ति के मामले में वो दखल न दें.
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