पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच राजनीतिक दल अब सिर्फ रैलियों और बैठकों तक सीमित नहीं हैं. पार्टियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जमीन पर उनकी असली स्थिति क्या है? कौन सा विधानसभा क्षेत्र मजबूत है, कहां पार्टी को नुकसान हो सकता है और किन सीटों पर उम्मीदवार बदलने की जरूरत पड़ सकती है, इसे लेकर सीट-टू-सीट सर्वे कराया जा रहा है. बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल अपने-अपने स्तर पर यह कवायद कर रहे हैं.
पंजाब में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं. आम आदमी पार्टी के पास फिलहाल 95 सीटें हैं. ऐसे में सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही आप के लिए अपने मौजूदा विधायकों की स्थिति जानना अहम है.
वहीं कांग्रेस, बीजेपी और शिअद भी अपने संगठन, संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय मुद्दों की ताकत परख रहे हैं. इन सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों और कमजोर सीटों पर फोकस तय किया जा सकता है.
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कांग्रेस तीसरे सर्वे की तैयारी में
कांग्रेस अब तक पंजाब में दो सर्वे करा चुकी है और तीसरे सर्वे की तैयारी चल रही है. इसके लिए सर्वे स्ट्रेटजी इंचार्ज की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है. बताया जा रहा है कि निजी एजेंसी के जरिए होने वाले इस सर्वे की निगरानी एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता करेंगे. इसकी मॉनिटरिंग राहुल गांधी के कार्यालय की ओर से भी की जाएगी.
इस बार सर्वे टीम में पंजाब से बाहर के लोगों को शामिल करने पर जोर है, ताकि स्थानीय नेताओं का असर कम से कम रहे. सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट हाईकमान तक जाएगी और इसकी एक प्रति पंजाब कांग्रेस को भी दी जाएगी. माना जा रहा है कि टिकट तय करने में भी इस रिपोर्ट की अहम भूमिका रहेगी.
आप विधायकों की पकड़ जांच रही
आम आदमी पार्टी अपने मौजूदा विधायकों और मंत्रियों का भी फील्ड फीडबैक ले रही है. सर्वे में यह देखा जा रहा है कि करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल के बाद विधायक की अपने इलाके में कितनी पकड़ बची है, जनता के बीच उसकी छवि कैसी है और स्थानीय स्तर पर संगठन कितना मजबूत है. इसी आधार पर कई मौजूदा चेहरों को दोबारा मौका देने या बदलाव करने पर फैसला हो सकता है.
बीजेपी ने कराए 5 आंतरिक सर्वे
बीजेपी भी जमीनी फीडबैक को काफी अहमियत दे रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 5 आंतरिक सर्वे कराए जा चुके हैं. 117 सीटों पर बूथ स्तर की स्थिति, उम्मीदवार की स्वीकार्यता और स्थानीय मुद्दों की जानकारी जुटाई जा रही है. शुरुआती फीडबैक में नशाखोरी और कानून-व्यवस्था को बड़े मुद्दों के तौर पर देखा गया है.
शिअद ग्रामीण सीटों पर ज्यादा फोकस
शिरोमणि अकाली दल भी संभावित उम्मीदवारों और संगठन की ताकत का आकलन कर रहा है. पार्टी की टीम के साथ निजी एजेंसी से भी सर्वे कराया जा रहा है. ग्रामीण इलाकों की सीटों पर खास ध्यान है. इसके अलावा सिख कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों और युवाओं से सीधे बातचीत कर हर हलके का माहौल समझने की कोशिश की जा रही है.
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चुनाव से पहले पंजाब की सियासत में यह सर्वे अब पार्टियों के लिए एक तरह का ‘ग्राउंड रिपोर्ट कार्ड’ बन गया है. इसी रिपोर्ट से तय होगा कि किस सीट पर कितना जोर लगाना है और चुनावी मैदान में किन चेहरों पर दांव खेलना है.