पंजाब के संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के दौरान काला झंडा लेकर प्रदर्शन करने वाले मोहनजीत सिंह की पुलिस हिरासत में हुई पिटाई के मामले में सुनम DSP हरविंदर सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया है. साथ ही मामले में 3 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है. इंस्पेक्टर परतेक जिंदल, SI बलजीत सिंह और ASI हरप्रीत सिंह को पुलिस लाइन संगरूर भेजा गया है.
पंजाब के संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कार्यक्रम के दौरान काला झंडा दिखाने वाले सिख युवक को कथित तौर पर हिरासत में यातना दिए जाने को लेकर शुक्रवार को विवाद खड़ा हो गया. विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधते हुए मामले की जांच की मांग की है. पीड़ित युवक की पहचान संगरूर के शेरों गांव निवासी मोहनजीत सिंह के रूप में हुई है.
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पीड़ित युवक ने लगाया ये आरोप
मोहनजीत ने आरोप लगाया है कि दो सितंबर को मान के ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम स्थल के पास एक मकान की छत से काला झंडा दिखाने के बाद पंजाब पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर यातनाएं दी. युवक ने दावा किया कि वह मादक पदार्थों की समस्या पर लगाम लगाने में आप सरकार की कथित नाकामी के खिलाफ नारे लगा रहा था.
मोहनजीत ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उसे बिजली के झटके दिए गए, उसकी दाढ़ी खींची गई, उसके घावों पर नमक रगड़ा गया और उसके अंत:वस्त्र फाड़ दिए गए. हालांकि, संगरूर पुलिस ने मोहनजीत के आरोपों को खारिज कर दिया है.
संगरूर की एसएसपी ने दी यह जानकारी
संगरूर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रवजोत कौर ग्रेवाल ने कहा कि मोहनजीत गंभीर अपराधों में दर्ज आठ प्राथमिकी का सामना कर रहा एक अपराधी है. पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मोहनजीत ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में व्यवधान डालने की कोशिश की थी, जिसके बाद उसे एहतियातन हिरासत में लिया गया था.
अधिकारी ने यह भी कहा कि नशे की उसकी जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी. कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक अमन अरोड़ा ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस से पूछताछ की, जिसने मोहनजीत के आरोपों को खारिज कर दिया है. कई विपक्षी नेताओं ने हालांकि शुक्रवार को संगरूर के एक स्थानीय अस्पताल में मोहनजीत सिंह से मुलाकात की और इस मामले को लेकर आप सरकार की आलोचना की.
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