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पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के परिवार की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. राज्य में अपने पैर जमाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पटियाला के शाही परिवार के सहारे शहरी और ग्रामीण सिख मतदाताओं में जगह बनाने के लिए कोशिश करती दिख रही है. उधर आने वाले चुनाव खुद कैप्टन और उनके परिवार के लिए एक बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है.

दरअसल, यह आशंका जताई जा रही थी कि अमरिंदर सिंह दोबारा कांग्रेस में जा सकते हैं, लेकिन कैप्टन ने अटकलों पर विराम लगाते हुए संकेत दिए हैं कि वे फिलहाल बीजेपी में ही रहेंगे.

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2022 में बनाई थी लोक कांग्रेस पार्टी 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2022 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था और विधानसभा चुनाव में पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी बनाई थी, लेकिन पार्टी को चुनावों में कोई खास सफलता नहीं मिली थी और खुद कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला शहर से 19 हजार वोटों से हार गए थे. यह पहली बार था कि जब शाही परिवार को परिवार को हार मिली थी. इसके बाद कैप्टन ने सितंबर 2022 में अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया था और बेटे रणइंद्र सिंह और बेटी जयइंद्र कौर के साथ बीजेपी में शामिल हो गए थे.

पूर्व सांसद परनीत कौर और बेटी जयइंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण 

पंजाब की राजनीति में कैप्टन परिवार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है, जिसमें पूर्व सांसद परनीत कौर और बेटी जयइंद्र की भी भूमिका काफी अलग है. परनीत कौर बीते लंबे अरसे से पटियाला की राजनीति में प्रमुख चेहरा रही हैं और अब वे बीजेपी के साथ एक्टिव हैं.परनीत कौर ने 2024 में पटियाला सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. फिलहाल में इस समय बीजेपी के लिए महिला मोर्चा में सक्रिय हैं.

बीजेपी 117 सीटों की तैयारी में 

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक बीजेपी आगमी चुनाव में 117 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है. इसमें शहरी सीटों के साथ ही ग्रामीण पंजाब में भी अपनी क्षमता बढ़ानी है. इसमें कैप्टन परिवार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है.बीजेपी के लिए कैप्टन परिवार न सिर्फ पटियाला के साथ ही मालवा क्षेत्र में काफी मदद कर सकता है. लिहाजा वो अंत तक चाहेगी कि कैप्टन अमरिंदर सिंह बीजेपी में ही रहें.

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