पानीपत में शादी समारोह हो या कोई अन्य निजी कार्यक्रम, रात 10 बजे के बाद तेज आवाज में डीजे बजाना संचालकों और आयोजकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पानीपत ट्रैफिक पुलिस ने शहरभर के डीजे संचालकों को बुलाकर नियमों की जानकारी दी और उनका पालन करने की हिदायत दी. शहर में करीब 300 डीजे संचालक हैं. बैठक के दौरान संचालकों ने भी भरोसा दिया कि वे निर्धारित नियमों का पालन करेंगे.
पुलिस ने संचालकों को बताया कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक खुले स्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर व पब्लिक एड्रेस सिस्टम का इस्तेमाल सामान्य रूप से प्रतिबंधित है. डीजे बजाने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति जरूरी है. शादी समारोह या निजी कार्यक्रम होने मात्र से इन नियमों में छूट नहीं मिलती. नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है.
धार्मिक आयोजनों में सीमित छूट का प्रावधान
नियमों के अनुसार, राज्य सरकार धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजनों के लिए निर्धारित अधिकतम 15 दिनों में रात 10 बजे से 12 बजे तक सीमित छूट दे सकती है. यह छूट संबंधित अनुमति और शर्तों के अधीन होती है. इसके अलावा डीजे की आवाज निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर रखना भी जरूरी है. अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि संचालक मनमर्जी से तेज आवाज में डीजे चला सकते हैं.
ध्वनि प्रदूषण के नियमों में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए दिन और रात में परिवेशीय ध्वनि की सीमा तय की गई है. औद्योगिक क्षेत्र में दिन के समय 75 और रात में 70 डेसीबल, वाणिज्यिक क्षेत्र में 65 और 55 डेसीबल, आवासीय क्षेत्र में 55 और 45 डेसीबल तथा शांत क्षेत्र में 50 और 40 डेसीबल की सीमा निर्धारित है. अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और न्यायालयों के आसपास घोषित शांत क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतनी होती है.
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संचालकों ने दिया नियमों के पालन का भरोसा
पुलिस की ओर से डीजे संचालकों को नियमों की जानकारी देने और निर्धारित समय व ध्वनि सीमा का पालन करने के लिए कहा गया. बैठक में दीपक, आर्यन, साहिल, अवतार, विक्रम, गोपी और रिंकू सहित अन्य डीजे संचालक मौजूद रहे. संचालकों ने भी आश्वासन दिया कि वे ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन करेंगे.
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