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पाकिस्तान सेना के पूर्व अधिकारी जनरल नौमान महमूद (रिटायर्ड) को मक्का पैक्ट का पहला कमांडर नियुक्त किया गया है. इस समझौते में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी के बीच समझौता हुआ है. इसके तहत अगर किसी भी देश के पर हमला होता है, तो इसे संयुक्त हमला मानते हुए, तीनों देश उस देश के खिलाफ जंग छेड़ सकते हैं. जनरल नौमान इस पैक्ट के जनरल सेक्रेटेरिएट चीफ होंगे. इसे सऊदी अरब के रियाद में बनाया जा रहा है. 

पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक, इस्लामाबाद विदेश मंत्रालय के ऑफिस ने जानकारी दी, ‘पाकिस्तान सरकार मक्का ज्वाइंट सिक्योरिटी डील के तहत लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद हिलाल ए इम्तियाज को पहला सेक्रेटरी जनरल नियुक्त करते हुए खुशी महसूस हो रही है.’

1971 की जंग से नौमान का क्या रिश्ता

ऐसे में एक लिंक और सामने आया है, वो यह कि नौमान के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल राजा सुल्तान महमूद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 1971 के निर्णायक युद्ध में भारतीय सेना से लड़ते हुए मारे गए थे. अब ऐसे में उनका इस पद पर नियुक्त होना, एक अलग ही तरह की चाल के तौर पर सामने आया है. 

नौमान सेना की बलूच रेजिमेंट में सर्विस दे चुके हैं. उन्होंने देश के अशांत उत्तर पश्चिम इलाके में पाकिस्तान सेना की अहम कोर कमान संभाली थी. इसके अलावा इस्लामाबाद में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुके हैं. उनकी नियुक्ति ऐसे वक्त हुई है, जब यमन में हूती विद्रोहियों ने सऊदी के खिलाफ जंग के हालात बना दिए हैं. हूतियों ने सऊदी के इलाके में ताबड़तोड़ हमले किए ङैं. साथ ही लाल सागर के मुख्य समुद्री जलमार्ग बाब अल मंदेब को कब्जा लिया है. 

7 अगस्त को हुई है, तीनों देशों में डील
यह रक्षा समझौता पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच 7 अगस्त को हुआ. इस पर तीनों देशों ने साइन किया. इसे मक्का पैक्ट नाम से जाना गया है. यह NATO के आर्टिकल 5 की तहत पर ही बना है. यह एक तरह से सामूहिक सुरक्षा और तुरंत कार्रवाई का ढांचा तैयार करता है. यानी यह तय किया जाता है कि सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर माना जाएगा. इसकी पहली बैठक तुर्की के इस्तांबुल में हुई थी, जहां नौमान के नाम पर सहमति तीन देशों ने दी है. 





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