रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। उम्मीदें जितनी ऊंची थीं, फिल्म कई जगह उन्हें पूरा करती है, तो कुछ जगह थोड़ा चूक भी जाती है। फिल्म की कहानी
कहानी जसकीरत सिंह रांगी के अतीत से शुरू होती है, जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखता है। जेल से निकलकर वह भारत के लिए काम करने का मौका पाता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी बनकर अंडरकवर मिशन पर जाता है। पहले पार्ट के बाद अब कहानी ल्यारी की सत्ता और गैंगवार के इर्द-गिर्द घूमती है। रहमान डकैत की मौत के बाद खाली हुई गद्दी पर कब्जा, दुश्मनों का सफाया और अपने असली मिशन तक पहुंचना यही फिल्म का मूल है। इस बार कहानी में नोटबंदी, अतीक अहमद जैसे मुद्दों के संदर्भ और देश-विदेश की राजनीतिक कड़ियों को जोड़ा गया है। सबसे बड़ा सस्पेंस बड़े साहब का है, जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है। हालांकि यह खुलासा जितना बड़ा बनाया गया, उतना प्रभाव छोड़ नहीं पाता। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा और खिंचा हुआ लगता है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी पकड़ बनाती है और क्लाइमैक्स तक आते-आते