सवाल- मैं पटना से हूं। मेरी 10 साल की बेटी बहुत होशियार, समझदार है। लेकिन उसकी एक आदत बहुत परेशान करने वाली है। वो जो सोचती है, फट से बोल देती है। अगर उसे किसी की ड्रेस अच्छी नहीं लगी तो सीधे कह देती है, “ये अच्छी नहीं है।” अगर कोई दोस्त गलत खेले तो कह देगी, “तुम्हें खेलना नहीं आता।” वह बोलने से पहले सोचती नहीं है। दोस्त उसकी बातों का बुरा मान जाते हैं। उसकी कुछ दोस्तियां भी टूट चुकी हैं। ये साफगोई है या मुंहफटपन। मैं कन्फ्यूज हूं। समझ नहीं पा रही, उसे कैसे गाइड करूं। मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। सबसे पहले तो मैं आपको आश्वस्त करना चाहूंगी कि ये कोई ‘अवगुण’ नहीं है। ये आपकी बेटी की पर्सनैलिटी का एक ‘रॉ’ यानी कच्चा रूप है। 10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। उनमें अभी यह समझ पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती कि सच बोलने का तरीका भी मायने रखता है। साइकोलॉजी में इसे ‘सोशल फिल्टर डेवलपमेंट’ कहा जाता है। यह समझ जन्म से नहीं होती है, बल्कि धीरे-धीरे सीखने वाली चीज है। इसलिए बेटी को कम्युनिकेशन स्किल